मूल श्लोक
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपोनमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यम्न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
ākhyāhi me ko bhavānugrarūpo namo'stu te devavara prasīda vijñātumicchāmi bhavantamādyam na hi prajānāmi tava pravṛttim
अनुवाद
मुझे बतलाओ कि इस उग्र रूप को धारण करनेवाले तुम कौन हो? हे देवदेवश्रेष्ठ! तुम्हें नमस्कार करता हूँ! प्रसन्न हो जाओ! मैं जानना चाहता हूँ कि तुम आदिपुरुष कौन हो। क्योंकि मैं तुम्हारी इस करनी को (बिलकुल) नहीं जानता।