मूल श्लोक
यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् ।असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate
अनुवाद
जो जानता है कि मैं (पृथिवी आदि सब) लोकों का बड़ा ईश्वर हूँ, और मेरा जन्म तथा आदि नहीं है, मनुष्यों में वही मोह-विरहित होकर सब पापों से मुक्त होता है।
टिप्पणी
ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में यह विचार पाया जाता है, कि भगवान या परब्रह्म देवताओं के भी पहले का है, देवता पीछे से हुए (देखो गीतार॰ प्र. 9 पृ. 245)। इस प्रकार प्रस्तावना हो गई। अब भगवान इसका निरूपण करते है, कि मैं सब का महेश्वर कैसे हूँ –
— Lokmanya Tilak