भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १०.३ ·

English

मूल श्लोक

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् ।असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate

१०.३अध्याय १० · विभूतियोग४२ में से श्लोक ३

अनुवाद

जो जानता है कि मैं (पृथिवी आदि सब) लोकों का बड़ा ईश्वर हूँ, और मेरा जन्म तथा आदि नहीं है, मनुष्यों में वही मोह-विरहित होकर सब पापों से मुक्त होता है।

— Lokmanya Tilak

टिप्पणी

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में यह विचार पाया जाता है, कि भगवान या परब्रह्म देवताओं के भी पहले का है, देवता पीछे से हुए (देखो गीतार॰ प्र. 9 पृ. 245)। इस प्रकार प्रस्तावना हो गई। अब भगवान इसका निरूपण करते है, कि मैं सब का महेश्वर कैसे हूँ –

— Lokmanya Tilak

अध्याय १०, श्लोक १०.३