मूल श्लोक
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
bhavānbhīṣmaśca karṇaśca kṛpaśca samitiñjayaḥ aśvatthāmā vikarṇaśca saumadattistathaiva ca
अनुवाद
आप और भीष्म, कर्ण और रणजीत कृप, अश्वत्थामा और विकर्ण (दुर्योधन के सौ भाइयों में से एक), तथा सोमदत्त का पुत्र (भूरिश्रवा),