भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता १.४५ ·

English

मूल श्लोक

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् ।यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥

लिप्यंतरण (रोमन)

aho bata mahatpāpaṃ kartuṃ vyavasitā vayam yadrājyasukhalobhena hantuṃ svajanamudyatāḥ

१.४५अध्याय १ · अर्जुनविषादयोग४७ में से श्लोक ४५

अनुवाद

देखो तो सही! हम राज्य-सुख-लोभ से स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हुए हैं, (सचमुच) यह हमने एक बड़ा पाप करने की योजना की है!

— Lokmanya Tilak

अध्याय १, श्लोक १.४५