मूल श्लोक
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥
लिप्यंतरण (रोमन)
tataḥ śvetairhayairyukte mahati syandane sthitau mādhavaḥ pāṇḍavaścaiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ
अनुवाद
अनन्तर सफेद घोड़ों से जुते हुए बड़े रथ में बैठे हुए माधव (श्रीकृष्ण) और पांडव (अर्जुन) ने (यह सूचना करने के लिए कि अपने पक्ष की भी तैयारी है, प्रत्युत्तर के ढँग पर) दिव्य शंख बजाये।